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कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 30
अनेकलोकैकनमस्क्रियार्ह महेश्वरं तं त्रिदशेश्वरः स । भक्त्या नमस्कृत्य कृतार्थतायाः पात्रं पवित्रं परमं बभूव ॥
अनेकों लोकों द्वारा नमस्कार के योग्य उस महेश्वर को देवताओं के स्वामी इन्द्र ने भक्ति से प्रणाम करके अत्यन्त कृतार्थ और पवित्र बन गया।
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