मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 3
सङ्कन्दनः स्यन्दनतोऽवतीर्य मेघात्मनो मातलिदत्तहस्तः । पिनाकिनोऽथालयमुच्चचाल शुचौपिपासाकुलितो यथाम्भः ॥
इन्द्र अपने रथ से उतरकर, मेघस्वरूप वाहन से मातलि के हाथ का सहारा लेकर, जैसे प्यास से व्याकुल व्यक्ति जल की ओर जाता है, वैसे ही पिनाकधारी शिव के भवन की ओर चला।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें