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कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 27
इति प्रबद्धाञ्जलिरेत्य नन्दी निधाय कक्षामभिः हेम नेत्रम् । प्रसादपात्रं पुरतो भविष्णुरथ स्मरारातिमुवाच वाचम् ॥
इस प्रकार अंजलि बांधकर आए हुए इन्द्र को नन्दी ने कक्ष में स्थापित किया; तब वह प्रसाद पाने योग्य होकर स्मरारि शिव के समक्ष वचन कहने लगा।
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