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कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 20
भद्रासनं काञ्चनपादपीठ महार्हमाणिक्यविभङ्गिचित्रम् । अधिष्ठितं चन्द्रमरीचिगॉररुद्वीज्यमानं चमरैर्गणाभ्याम् ॥
स्वर्णपादपीठयुक्त, महामूल्यवान मणियों से सुसज्जित भद्रासन पर विराजमान, चन्द्रमा की किरणों के समान श्वेत चामरों से गणों द्वारा सेवित था।
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