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कुमारसंभवम् • अध्याय 12 • श्लोक 2
दृप्तारिसन्त्रासखिलीकृतात्स कथञ्चिदम्भोदविहारमार्गात् । अवातताराभिगिरि गिरीशगौरीपदन्यासविशुद्धमिन्द्रः ॥
गर्वित शत्रुओं के भय से व्याकुल इन्द्र किसी प्रकार मेघमार्ग से उतरकर उस पर्वत पर आया, जो शिव और गौरी के चरणों के स्पर्श से पवित्र था।
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