अपनी प्रिय और जिज्ञासु देवी के ये वचन सुनकर, निर्मल मुस्कान से युक्त चन्द्रचूड शिव ने अत्यन्त आनंद से उत्पन्न स्नेहभाव को प्रकट करने वाले वचन कहे।
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