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कुमारसंभवम् • अध्याय 11 • श्लोक 9
श्रुत्वेति वाक्यं हृदयप्रियायाः कौतूहलिन्या विमलस्मितश्रीः । सान्द्रप्रमोदोदयसैख्यहेतुभूतं वचोऽवोचत चन्द्रचूडः ॥
अपनी प्रिय और जिज्ञासु देवी के ये वचन सुनकर, निर्मल मुस्कान से युक्त चन्द्रचूड शिव ने अत्यन्त आनंद से उत्पन्न स्नेहभाव को प्रकट करने वाले वचन कहे।
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