इति बहुविधं बालक्रीडाविचित्रविचेष्टितं ललितललितंसान्द्रानन्दं मनोहरमाचरन् । अलभत परां बुद्धिं षष्ठे दिने नवयौवनं स किल सकलं शास्त्रं शस्त्रं विवेद विभुर्यया ॥
इस प्रकार विविध और विचित्र बाललीलाओं को करते हुए, अत्यन्त मधुर और गहन आनंददायक आचरण वाला वह बालक छठे दिन ही उच्चतम बुद्धि और नवयौवन को प्राप्त कर, समस्त शास्त्र और शस्त्रों का ज्ञान प्राप्त करने वाला विभु बन गया।
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