स्वाभाविक स्नेह से उनके हृदय अत्यन्त प्रसन्न हो उठे और उनकी आँखों से आनंदाश्रु बहने लगे; तब गिरिजा और शिव ने उस नवजात षडानन बालक को देखा।
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