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कुमारसंभवम् • अध्याय 11 • श्लोक 42
कञ्चित्स्खलद्भिः कश्चिदस्खलद्भिः कचित्प्रकम्पैः कचिदप्रकम्पैः । बालः स लीलाचलनप्रयोगैस्तयोमुदं वर्धयति स्म पित्रोः ॥
कभी लड़खड़ाते, कभी स्थिर, कभी कम्पित और कभी बिना कम्पन के, वह बालक अपनी लीलामय गतियों से माता-पिता के आनंद को बढ़ाता रहता था।
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