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कुमारसंभवम् • अध्याय 11 • श्लोक 4
अत्रान्तरे पर्वतराजपुत्र्या समं शिवः स्वैरविहारहेतोः । नभो विमानेन विगाहमानो मनोतिवेगेन जगाम तत्र ॥
उसी समय पर्वतराज की पुत्री के साथ भगवान शिव स्वेच्छा से विहार करने के उद्देश्य से आकाशमार्ग से विमान में अत्यन्त तीव्र गति से वहाँ पहुँचे।
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