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कुमारसंभवम् • अध्याय 11 • श्लोक 39
इत्थं महेशाद्रिसुतासुतस्य जन्मोत्सवे सम्मदयाञ्चकार । चराचरं विश्वमशेषमेतत्परं चकम्पे किल तारकश्रीः ॥
इस प्रकार महेश और पर्वतपुत्री के पुत्र के जन्मोत्सव ने समस्त चराचर जगत को आनंदित कर दिया और तारकासुर की प्रभा भी मानो कंपित हो उठी।
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