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कुमारसंभवम् • अध्याय 11 • श्लोक 33
दिक्षु प्रसर्पस्तदधीश्वराणामथामराणामिव मध्यलोके । महोत्सवं शंसितुमाहतोऽन्यैर्दध्वान धीरः पटहः पटीयान् ॥
चारों दिशाओं में अधिपतियों और देवताओं के मध्य उस महोत्सव की घोषणा करने के लिए प्रबल और गंभीर नगाड़ों की ध्वनि गूँज उठी।
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