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कुमारसंभवम् • अध्याय 11 • श्लोक 3
भागीरथीपावककृत्तिकानामानन्दबाष्पाकुललोचनानाम् । तं नन्दनं दिव्यमुपात्तुमासीत्परस्परं प्रौढतरो विवादः ॥
भागीरथी, अग्नि और कृतिकाओं की आँखें आनंदाश्रुओं से भरी हुई थीं; उस दिव्य बालक को अपनाने के लिए उनके बीच आपस में अत्यन्त प्रबल विवाद होने लगा।
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