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कुमारसंभवम् • अध्याय 11 • श्लोक 26
हैमी फलं हेमगिरेर्लतेव विकस्वरं नाकनदीव पद्मम् । पूर्वव दिङ्गतनमिन्दुमाभात्तं पार्वती नन्दनमा‌द्धाना ॥
स्वर्ण पर्वत की लता के फल के समान, आकाशगंगा के खिले हुए कमल के समान और पूर्व दिशा में उदित चन्द्रमा के समान वह पार्वती का पुत्र अत्यन्त शोभायमान हुआ।
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