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कुमारसंभवम् • अध्याय 11 • श्लोक 25
सुखाश्रुपूर्णेन मृगाङ्कमौलेः कलत्रमेकेन मुखाम्बुजेन । तस्यैकनालो गतपञ्चपद्मलक्ष्मी क्रमात्षवदनीं चुचुम्ब ॥
आनंदाश्रुओं से भरे नेत्रों वाले चन्द्रमौलि शिव की एकमात्र पत्नी ने अपने मुखकमल से, एक ही नाल से उत्पन्न पाँच कमलों की लक्ष्मी के समान, क्रमशः उसके छह मुखों का चुम्बन किया।
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