मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 11 • श्लोक 22
स्वमङ्कमारोप्य सुधानिधानमिवात्मनो नन्दनमिन्दुवक्रा । तमेकमेषां जगदेकवीरं बभूव पूज्या धुरि पुत्रिणीनाम् ॥
चन्द्रमा के समान मुखवाली पार्वती ने अपने उस पुत्र को, जो मानो अमृत का भंडार था, अपनी गोद में बैठाकर, उसे सबका एकमात्र वीर बना दिया और स्वयं पुत्रवती स्त्रियों में श्रेष्ठ होकर पूजनीय हो गई।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें