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कुमारसंभवम् • अध्याय 11 • श्लोक 19
सुविस्मयानन्द‌विकस्वरायाः शिशुर्गलद्वाष्पतरङ्गितायाः । विवृद्धवात्सल्यरसोत्तराया देव्या दृशोर्गोचरतां जगाम ॥
अत्यधिक विस्मय और आनंद से विकसित, आँसुओं की तरंगों से भरी और बढ़े हुए वात्सल्यरस से युक्त उस देवी की दृष्टि में वह शिशु प्रकट हुआ।
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