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कुमारसंभवम् • अध्याय 11 • श्लोक 1
अभ्यर्थ्यमाना विबुधैः समग्रैः प्रहेः सुरेन्द्रप्रमुखैरुपेत्य । तं पाययामास सुधातिपूर्ण सुरापगा स्वं स्तनमाशु मूर्ता ॥
समस्त देवताओं द्वारा विनती किए जाने पर, इन्द्र आदि देवताओं के साथ वहाँ आकर, अमृत से पूर्ण दिव्य गंगा ने मूर्त रूप धारण कर उसे शीघ्र ही अपने स्तन से पान कराया।
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