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कुमारसंभवम् • अध्याय 10 • श्लोक 9
वचोभिर्मधुरैः सार्थैर्वनश्रेण मया स्तुतः । प्रीतिमानभवद्देवः स्तोत्रं कस्य न तुष्टये ॥
मेरे द्वारा मधुर और अर्थपूर्ण वचनों से स्तुति करने पर देव प्रसन्न हो गए, क्योंकि स्तुति किसे प्रसन्न नहीं करती।
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