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कुमारसंभवम् • अध्याय 10 • श्लोक 59
ततः शरवणे सार्धं भयेन ब्रीडया च ताः । तद्गर्भजातमुत्सृज्य स्वान् गृहानभिनिर्ययुः ॥
फिर भय और लज्जा से उन्होंने उस गर्भ को शरवन में छोड़कर अपने-अपने घरों को लौट गईं।
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