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कुमारसंभवम् • अध्याय 10 • श्लोक 56
अक्षमा दुर्वहं वोढुमम्बुनो बहिरातुराः । अग्निं ज्वलन्तमन्तस्ता दधाना इव निर्ययुः ॥
उस दुर्वह तेज को धारण न कर पाने के कारण वे व्याकुल होकर जल से बाहर निकल आईं, मानो भीतर अग्नि धारण किए हों।
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