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कुमारसंभवम् • अध्याय 10 • श्लोक 46
ब्रह्मध्यानपरैर्योगपरैर्ब्रह्मासनस्थितैः । योगनिद्रागतैर्योगपट्टबन्धैरुपाश्रिताम् ॥
ब्रह्म ध्यान में लीन, योग में स्थित, योगासन पर बैठे और योगनिद्रा में स्थित योगियों द्वारा वह सेवित थी।
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