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कुमारसंभवम् • अध्याय 10 • श्लोक 44
शुभैरभ्रङ्कषैरूर्मिशतैः स्वर्गनिवासिनाम् । कथयन्तीमिवालोकावगाहा चमनादिकम् ॥
उसकी शुभ तरंगें मानो स्वर्गवासियों के लिए स्नान और आचमन आदि के विधानों का संकेत कर रही थीं।
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