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कुमारसंभवम् • अध्याय 10 • श्लोक 39
सुधासारैरिवाम्भोभिरभिषिक्तो हुताशनः । यथागतं जगामाथ परां निर्वृतिमादधत् ॥
अमृत तुल्य जल से अभिषिक्त होकर अग्नि अपने स्थान पर लौट गया और परम शांति प्राप्त की।
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