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कुमारसंभवम् • अध्याय 10 • श्लोक 33
सम्मिलद्भिर्मरालैः सा कलं कूजद्भिरुन्मदैः । ददे श्रेयांसि दुःखानि निहन्मीति तमभ्यधात् ॥
हंसों के मधुर कूजन के साथ उसने उससे कहा—मैं तुम्हें कल्याण दूँगी और दुःखों का नाश करूँगी।
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