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कुमारसंभवम् • अध्याय 10 • श्लोक 31
विष्णुपादोदकोद्भूता, ब्रह्मलोकादुपागता । त्रिभिः स्त्रोतोभिरश्रान्तं पुनाना भुवनत्रयम् ॥
विष्णु के चरणों के जल से उत्पन्न होकर, ब्रह्मलोक से आई हुई गंगा तीन धाराओं से निरंतर तीनों लोकों को पवित्र करती है।
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