इत्युदीर्य सुनासीरो विरराम, स चानलः । तद्विसृष्टस्तमापृच्छ्य प्रतस्थे स्वर्धनीमभि ॥
ऐसा कहकर इन्द्र रुक गए, और अग्नि उनसे विदा लेकर स्वर्ग की नदी की ओर चल पड़ा।
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