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कुमारसंभवम् • अध्याय 10 • श्लोक 26
शम्भोरम्भोमयी मूर्तिः सैव देवी सुरापगा । त्वत्तः स्मरद्विषो बीजं दुर्धरं धारयिष्यति ॥
वह गंगा, जो शम्भु की जलमयी मूर्ति है, तुम्हारे द्वारा धारण किए गए स्मरद्वेषी शिव के कठिन बीज को धारण करेगी।
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