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कुमारसंभवम् • अध्याय 10 • श्लोक 22
जगतः सकलस्यास्य त्वमेकोऽस्युपकारकृत् । कार्योपपादने तत्र त्वत्तोऽन्यः कः प्रगल्भते ? ॥
इस समस्त जगत के उपकार करने वाले तुम ही एक हो; कार्य सिद्ध करने में तुमसे बढ़कर और कौन समर्थ है?
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