अन्तश्वरोऽसि भूतानां, तानि त्वत्तो भवन्ति च । ततो जीवितभूतस्त्वं जगतः प्राणदोऽसि च ॥
तुम समस्त प्राणियों के भीतर स्थित हो और वे तुमसे ही उत्पन्न होते हैं; इसलिए तुम ही जगत के प्राणदाता और जीवनस्वरूप हो।
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