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कुमारसंभवम् • अध्याय 10 • श्लोक 15
इति श्रुत्वा वचो बद्धेः परितापोपशान्तये । हेतुं विचिन्तयामास मनसा विबुधेश्वरः ॥
इस प्रकार उसके वचन सुनकर देवेश ने उसके दुःख को दूर करने का उपाय मन में विचार किया।
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