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कुमारसंभवम् • अध्याय 10 • श्लोक 1
आससाद सुनासीरं सदसि त्रिदशैः सह । एष त्रैयम्बकं तीव्र वहन्वह्निमंहन्महः ॥
वह अग्नि, त्रिदशों के साथ सभा में इन्द्र के समीप पहुँचा, और त्र्यम्बक के तीव्र तेज को धारण किए हुए था।
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