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कुमारसंभवम् • अध्याय 1 • श्लोक 9
कपोलकण्डूः करिभिर्विनेतुं विघट्टितानां सरलद्रुमाणाम् । यत्र स्रुतक्षीरतया प्रसूतः सानुनि गन्धः सुरभीकरोति ॥
जहाँ हाथियों द्वारा गालों की खुजली मिटाने के लिए रगड़े गए सरल वृक्षों से निकला दूध के समान स्राव पर्वत-शिखरों को सुगंधित करता है।
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