जहाँ धातुरस से लिखे हुए अक्षरों वाली, हाथियों के रक्त से लाल हुई भोजपत्र की छालें विद्याधरी स्त्रियों के अंग-लेखन के कार्य में प्रयुक्त होती हैं।
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