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कुमारसंभवम् • अध्याय 1 • श्लोक 7
न्यस्ताक्षरा धातुरसेन यत्र भूर्जत्वचः कुञ्जरबिन्दुशोणाः । व्रजन्ति विद्याधरसुन्दरीणामूनङ्गलेखक्रिययोपयोगम् ॥
जहाँ धातुरस से लिखे हुए अक्षरों वाली, हाथियों के रक्त से लाल हुई भोजपत्र की छालें विद्याधरी स्त्रियों के अंग-लेखन के कार्य में प्रयुक्त होती हैं।
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