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कुमारसंभवम् • अध्याय 1 • श्लोक 58
अनर्घ्यमर्येण तमद्रिनाथः स्वर्गीकसामर्चितमर्चयित्वा । आराधनायस्य सखीसमेतां समादिदेश प्रयतां तनूजाम् ॥
पर्वतराज ने उस पूजनीय शिव की उत्तम विधि से पूजा कर, अपनी पुत्री को सखियों सहित उनकी आराधना के लिए नियुक्त किया।
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