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कुमारसंभवम् • अध्याय 1 • श्लोक 50
तां नारदः कामचरः कदाचित्कन्यां किल प्रेक्ष्य पितुः समीपे । समादिदेशैकवधं भवित्री प्रेम्णा शरीरार्धहां हरस्य ॥
एक बार काम के प्रेरक नारद ने उस कन्या को देखकर उसके पिता के समीप यह उपदेश दिया कि वह प्रेमवश हर के शरीर का आधा भाग प्राप्त करने वाली पत्नी बनेगी।
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