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कुमारसंभवम् • अध्याय 1 • श्लोक 42
कण्ठस्य तस्याः स्तनबन्धुरस्य मुक्ताकलापस्य च निस्तलस्य । अन्योन्यशोभाजननाद्वभूव साधारणो भूषणभूष्यभावः ॥
उसके कंठ, स्तनों की सुन्दरता और बिना आधार के लटके मुक्तामालाओं के बीच परस्पर शोभा उत्पन्न होने से आभूषण और शरीर दोनों का भेद मिट गया।
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