यह मान्यता है कि संसार में कोमलता ही कामदेव के पुष्पबाणों की सफलता का कारण है; इसलिए मेरा विचार है कि उसके दोनों भुजाएँ शिरीष पुष्प से भी अधिक कोमल हैं, जिन्हें पराजित होने पर भी मकरध्वज ने हर के कंठ में पाश के रूप में डाल दिया।
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