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कुमारसंभवम् • अध्याय 1 • श्लोक 40
अन्योन्यमुत्पीडयदुत्पलाक्ष्याः स्तनद्वयं पाण्डु तथा प्रवृद्धम् । मध्यं यथा श्याममुखस्य तस्य मृणालसूत्रान्तरमप्यलभ्यम् ॥
उस कमलनयनी के दोनों स्तन परस्पर सटे हुए और विकसित थे, और उनके बीच का स्थान इतना संकीर्ण था कि मानो श्याम मुख वाले कमल के बीच मृणालसूत्र का भी स्थान न हो।
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