उसके शरीर के लिए बिना आभूषण का ही श्रृंगार था, बिना मदिरा के ही मद उत्पन्न करने का साधन था और कामदेव के लिए पुष्पों के अतिरिक्त अन्य अस्त्र था; इस प्रकार वह बाल्यावस्था से आगे बढ़कर यौवन को प्राप्त हुई।
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