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कुमारसंभवम् • अध्याय 1 • श्लोक 30
तां हंसमालाः शरदीव गङ्गां महौषधिं नक्तमिवात्मभासः । स्थिरोपदेशामुपदेशकाले प्रपेदिरे प्राक्तनजन्मविद्याः ॥
जैसे शरद ऋतु में गंगा, रात्रि में चमकती महौषधियाँ, वैसे ही पूर्व जन्म की विद्या उसे उचित समय पर स्थिर उपदेश के रूप में प्राप्त हुई।
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