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कुमारसंभवम् • अध्याय 1 • श्लोक 23
प्रसन्नदिक्पांसुविविक्तवातं शङ्खस्वनानन्तरपुष्पवृष्टि। शरीरिणां स्थावरजङ्गमानां सुखाय तज्जन्मदिनं बभुव ॥
उसका जन्मदिन सभी दिशाओं के प्रसन्न होने, धूल रहित वायु के चलने, शंखध्वनि और तत्पश्चात् पुष्पवृष्टि के साथ, स्थावर और जंगम सभी प्राणियों के सुख का कारण बना।
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