उसने नागों की स्त्रियों के उपभोग के योग्य मैनाक पर्वत को जन्म दिया, जो समुद्र का मित्र था और जिसे वृत्र के शत्रु इन्द्र द्वारा पंख काटे जाने पर भी वज्र के आघात का ज्ञान नहीं हुआ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।