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कुमारसंभवम् • अध्याय 1 • श्लोक 16
सप्तर्षिहस्तावचिता वशेषाण्यधो विवस्वान्परिवर्तमानः । पद्मानि यस्याग्रसरोरुहाणि प्रबौधयत्यूर्ध्वमुखैर्मयूखैः ॥
जहाँ सूर्य नीचे की ओर घूमते हुए सप्तर्षियों के हाथों से छुए हुए अवशेषों को पार कर, अपने ऊपर उठते हुए किरणों से आगे स्थित कमलों को खिलाता है।
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