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कुमारसंभवम् • अध्याय 1 • श्लोक 10
वनेचराणां वनितासखानां दीगृहोत्सङ्गनिषक्तभासः । भवन्ति यत्रौषधयो रजन्यामतैलपूराः सुरतप्रदीपाः ॥
जहाँ वन में रहने वालों की स्त्रियों के गृहों के आँगन में स्थित औषधियाँ रात्रि में बिना तेल के ही प्रेमक्रीड़ा के दीपक बन जाती हैं।
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