श्मशानं तद् गृहं देवि स पापी श्वपचाधमः ।
यः प्रविश्य कुलं धर्म कुलाचारं न वेत्ति चेत् ॥
जो कुलधर्म में प्रवेश कर कुलाचार को नहीं जानता, उसका घर श्मशानवत् है और वह स्वयं चाण्डाल से भी अधिक पतित होता है।
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