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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 98
दत्तमिष्टं हुतं तप्तं पूजितं जप्तमम्बिके । कौलिकस्य भवेद्वयर्थं कुलज्ञं योऽवमानयेत् ॥
कुलज्ञ की उपेक्षा करने से हानि-जो कुल के ज्ञाता का अपमान करता है, उसके द्वारा किया गया अभीष्ट दान, हवन, पूजन और जप सब व्यर्थ होता है।
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