त्वद्भक्तपूजनाद्देवि पूजितोऽहं न संशयः ।
तस्मान्मम प्रियाकाङ्क्षी त्वद्भक्तानेव पूजयेत् ॥
अतः आपके भक्त की पूजा होने से हे देवि! मैं पूजित होता हूँ, इसमें सन्देह नहीं। इसलिये जो मेरी प्रसन्नता चाहते हैं, उन्हें आपके भक्तों की ही पूजा करनी चाहिए।
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