समाश्वसन्ति पितरः सुवृष्टिमिव कर्षकाः ।
योऽस्मत्कुलेषु पुत्रो वा पौत्रो वा कौलिको भवेत् ॥
किसानों को अच्छी वर्षा से जैसे सन्तोष मिलता है, उसी प्रकार पितरों को आशा होती है कि 'हमारे कुलों में भी पुत्र या पौत्र कौलिक होगा'।
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