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कुलार्णव • अध्याय 9 • श्लोक 82
सर्वज्ञो वापि मूखों वाप्युत्तमो वाऽधमोऽपि वा । यत्र देवि कुलज्ञानी तत्राहञ्च त्वया सह ॥
हे देवि! जहाँ कुलज्ञानी है, वहीं मैं आपके साथ रहता हूँ, भले ही वह सर्वज्ञ हो या मूर्ख, उत्तम हो या अधम।
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